Tuesday, June 25, 2013

मच्छर जाएगा जिम, हाथी करेगा डाइटिंग

हिन्दी कविताएँ

शेरसिंह बना रहे थे

योजनाएँ कईं सारी

आई छुट्टी मस्ती वाली

करना है कुछ तैयारी

मच्छर को अबकि बार

रोज जिम जाना है

करके कसरत मेहनत वाली

अपना वजन बढ़ाना है

कौए को तो कल से ही

म्यूजिक क्लास जाना है

कोयल रानी के साथ मिलकर

मधुर गीत गाना है

हाथी को रहना है डायटिंग पर

संतुलित भोजन खाना है

भारी भरकम शरीर को

स्लिम-स्लिम बनाना है................
देखू-देखू केहेन जमाना आबि गेल
मनुखक हृदय भऽ गेल केहेन कठोर
सभ सॅं मुँह नुकौने, चुपेचाप
भागि रहल अछि एकटा किडनी चोर।

डॉक्टर भऽ के करैत अछि डकैति
कोनो ग़रीबक बेच लैत अछि किडनी
पुलिस तकैत अछि ओकरा इंडिया मे
मुदा ओ परा जाइत अछि सिडनी।

कोनो ग़रीबक किडनी बेचि कऽ
संपति अरजबाक केहेन ई अमानवीय भूख
केकरो मजबूरीक फायदा उठा कऽ
डॉक्टर तकैत अछि खाली अपने सूख।

केकरो जिनगी बॅंचौनिहार डॉक्टर रूपयाक लोभ मे

Monday, February 6, 2012

" मैथिलि "

" मैथिलि "
मैथिली के अभिमान मैथिली
मिथिला के सम्मान मैथिली
मैथिलत्व के पहचान मैथिली
जनकसुता के नाम मैथिली
कोशी कमला बलान (धार) मैथिली
गंगा के किनार मैथिली
अतुल ज्ञानक भंडार मैथिली
राजेश कुमार ठाकुर हम छि मिथिलावासी

" के मैथिल " ?

" के मैथिल " ?
जहानक परम सत्य
जेकरा अंग्रेजिया युनिभर्सल ट्रुथ कहि छथि
" सूरज पूवमे उगैछ " !
जों बेर - बेर आदित्यसँ पूछल जाए
तं की हएत......?


ओहो भ जेताह भक
की देखबाए चाहै छथि
संसारक लोक......
किहम कर्तव्य पथस विमुख छि ?
प्रत्याक्ष्कें प्रमाण की ?
किअए देतीह वैदेही बेर-बेर अग्नि परिक्षा !
दशानन जों सियासं
करितथि सम्पर्कक प्रयास
भाष्मिभुत हएब निश्चित छल
भगवानोकें बूझाल छलनि
तखन रघुबर किअए लेलनी
सीताक अग्नि परिक्षा ?
मिथिलाक बेटी कते गेलीह .......
दोख ककर ?


राजधर्म वा कर्तव्यबोध
भरिगर पड़ल लोकक अविश्वास
ओकरे आँखिमे नोर नै .....
तै दूर नै भगाऊ
जों मिथिलाकें बचेबाक इच्छा रखै छि
बेर-बेर किअए कहै छि
" हमहूँ मैथिल "
कखनों तं अपन मौनसँ पूछू
" आहाँ मैथिल , आकि हम मैथिल "
फूलबाबूकें भेट्लानी पुरुस्कार
वयानक धेने हथियार
मुदा, हुनक नेना-भुटका
मैथिली सँ अनभुआर ......

फूलबा मैथिलिक नै अछि साहित्यकार
मुदा हाथ में भाषाक पतवार
धेने घुमी रहल अपन खेत- पतवार
डोंका- कांकोर बीछ ओ
भैटक लाबा चिबा क5
उफनैत सोनित जरा रहल अछि
मिथिला में बैसल
मुदा ,
प्रश्न रहिये गेल

" के मैथिल "

राजेश कुमार ठाकुर हम छि मिथिलावासी